चीन दुनिया का धूर्ततम देश है, अपनी विस्तारवादी नीतियों के कारण सभी पड़ौसी देशों से उसका विवाद चलता रहता है।
वर्तमान में लद्दाख में गलवां नदी के आसपास भारत की ओर से एक महत्वपूर्ण सड़क के निर्माण को बाधित करने को लेकर 5 मई को चीनी सैनिकों और भारतीय सैनिकों के बीच लोहे की छड़ों और डंडों के साथ झड़प हुई थी। इसमें दोनों तरफ के कई सैनिक घायल भी हुए हैं लेकिन भारत ने भी स्पष्ट कर दिया कि वह ड्रैगन की धमकियों की परवाह किये बिना अपना निर्माण कार्य जारी रखेगा।
चीन ने भारत को दबाव में लेने के लिए नेपाल के कम्युनिस्ट नेतृत्व को भी बाध्य किया। कोरोना महामारी से पूरी दुनिया को आतंकित करने वाला ड्रैगन पूरी दुनिया के निशाने पर हैं इसलिए भले ही वह बातचीत और शांति की भाषा का ढोंग करे लेकिन बदनियति का उसका इतिहास रहा है।
विदित रहे 1962 में भी इस धुर्त राष्ट्र ने हिंदी-चीनी भाई-भाई का नारा लगाते हुए भारत की 38000+ 5180=43180 वर्ग मीटर जमीन हथिया ली थी इसलिए वर्तमान नेतृत्व को किसी भी स्थिति में चीन की बात पर विश्वास करना आत्मघाती कदम होगा।
लेखक
गंगासिंह
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