अमेरिकी हिंसा की आग मे दंगो की रोटियाँ सेकने की साज़िश
नरेंद्र दामोदरदास मोदी, एक ऐसा शक्तिशाली नेतृत्व जिसका लोहा आज सारा विश्व मानता हैं! आज जब "कोरोना" के विरुद्ध लड़ाई मे भारत की स्थिति अनेको विकसित राष्ट्रों से बेहतर हैं तो देशवासियों मे मोदी जी के प्रति विश्वास का बढ़ना स्वभाविक हैं। इससे स्तब्ध "टुकड़े-टुकड़े गैंग" येन-केन-प्रकारेण माननीय प्रधानमंत्री जी की छवी बिगाड़ने को आतुर हैं। भारतीय अखंडता के ये शत्रु अपने इसी ध्येय की पूर्ति हेतु अमेरिका मे हुई एक अश्वेत की हत्या को भारतीय मुसलमानो को भड़काने हेतु प्रयुक्त करने के असफल प्रयास कर रहे हैं। आख़िर अमेरिका मे घटित इस घटना का भारतीय मुसलमानों से क्या संबंध?
भारत के मुसलमान विश्व के सबसे सुखी मुसलमानों मे से हैं। देश मे अल्पसंख्यको को जितने अधिकार प्राप्त हैं उतने तो बहुसंख्यको को भी नहीं हैं। मुस्लिम महिलाओं के प्रति अत्याचार की पराकाष्ठा बन चुके "तीन तलाक" जैसी घृणित प्रथा का अंत करने वाली मोदी सरकार इन्हे न जाने किस प्रकार मुस्लमान विरोधी नज़र आती हैं। यह हर्ष का विषय हैं की इनके प्रयासों के बाद भी देश के मुस्लमान इनके झांसे मे नहीं आये हैं और देशभर मे शांति व्याप्त है। किन्तु यह पीड़ा इन तथाकथित बुद्धिजीवियों से बर्दाश्त नहीं हो रही है। अतः इन्होने "Victim Card" खेला और दंगाइयों की गिरफ़्तारी को मुस्लिम विरोध का नाम देने का भी प्रयास किया। दंगाइयों की धड़ पकड़ मुस्लिम विरोध कैसे हो सकती हैं ?
राष्ट्र को हिन्दू-मुस्लिम के नाम पर बाँटने वाले राष्ट्रीय एकता के इन शत्रुओं को मुँहतोड़ ज़वाब देने की आवश्यकता है। समय की मांग हैं, प्रत्येक भारतीय प्रण ले की राष्ट्रीय एकता को टुकड़े-टुकड़े करने को प्रतिबद्ध इस "टुकड़े-टुकड़े गैंग" के मंसूबो को टुकड़े- टुकड़े कर हम अपने राष्ट्र प्रेम का परिचय दे और अनेकता मे एकता की परिचायक हमारी भारतीय संस्कृति को गौरवान्वित करें।
लेखिका
विनीता राजपुरोहित
(सहायक आचार्य, अर्थशास्त्र)
0 Comments:
Post a Comment