जब कभी भी हमारे मुख से यह नाम उच्चारित होता है तब हमारे मन मे एक ऐसे शालीन, मर्यादा पुरुषोत्तम, कुशल नेतृत्व कर्ता व सबको सम्मान देने वाले भगवान श्री राम की मनमोहक छवि दिखाई देती है। लॉक डाउन के दौरान श्री रामानंद सागर द्वारा निर्देशित रामायण को पुनः देखने का अवसर मिला।सीता स्वयंवर के पश्चात राम के राज्याभिषेक की तैयारी के बीच मंथरा की भूमिका को टरनिंग पॉइंट कह सकते है, मंथरा ने ही केकई की बुद्धि परिवर्तित की व राम के वनवास की राह तैयार की। राम से बिछुड़ने का दृश्य बड़ा मार्मिक रहा, राजा दशरथ, माता कौशल्या, माता सुमित्रा पर जैसे दुःख का पहाड़ टूट पड़ा लेकिन इसमे मुझे सबसे ज्यादा दुःख उर्मिला का लगा जो अपने आँसू भी नही निकाल सकी।निषाद राज व श्री राम का संवाद आज के युग हिसाब से महत्वपूर्ण जो सामाजिक समरसता को दर्शाता है। लेकिन सबसे भाग्यशाली मुझे केवट लगा जिसने प्रभु श्रीराम को गंगा नदी पार करा अपने भवसागर पार करने व्यवस्था कर ली। ये सारे दृश्य मै मेरे परिवार सहित देख रहा था,,, सबकी आँखों अश्रु थे,, TV पर देखने पर ये हाल है तो साक्षात जिन्होंने ये दृश्य देखा होगा उनका क्या हाल हुआ होगा?पहली बार आज कुछ लिखने को मन किया,,,,,आपका मार्गदर्शन मिलेगा तो अन्य विषय पर भी लिखूँगा,,,आपका अपना
पंकज त्रिवेदी




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