
माननीय प्रधानमंत्री जी ने 5 अप्रेल को रात्रि 9 बजे दीप प्रज्जवलन से रोशनी करने का आह्वान किया है। इसके लिए एक शब्द मेरे मन मे आया "सामूहिक प्रकाश पर्व।"
प्रधानमंत्री जी के इस आह्वान की बहुत सारी व्याख्याएं तुरंत ही होने लगी है। जितने मुंह उतनी बातें... जैसी दृष्टि वैसी सृष्टि।
विज्ञान के आधार पर, ज्योतिष के आधार पर, अंक शास्त्र के आधार पर, प्रदोष तिथि के आधार पर, मनोविज्ञान के आधार पर, सामूहिकता के आधार पर, एक देश एक भाव इस आधार बहुत सारी व्याख्या हुई है अनेक टिप्पणी आई है।
बहुत सारी बातों को पढ़ते-पढ़ते एक विचार मेरे मन में भी आया आपके साथ साझा करता हूं। वर्षों तक विद्यार्थी परिषद में कार्य करते हुए यह वाक्य बहुत सुनने में आया है- "कार्यक्रम से कार्यकर्ता।"
ऐसा लगता है कि इस वैश्विक महामारी के संकट से मुकाबला करने के लिए प्रधानमंत्री जी पूरे देश को कार्यकर्ता बना रहे। एक प्रकार से पूरे देश का कार्यकर्ताकरण हो रहा है... "भारत माता के कार्यकर्ता।" समाज में संगठन नहीं पूरे समाज का ही संगठन।
लॉक डाउन की अवधि में सभी घर में है। व्यवस्था में लगे हुए लोगों को और कुछ प्रतिशत लोगो को छोड़ दें तो लगभग 130 करोड़ लोग अपने अपने घरों में ही हैं। उनमें सामूहिकता का भाव जागृत रहे, टीम स्प्रिट का भाव मन में रहे, मनोवैज्ञानिक रूप से उन्हें संबंलन मिलता रहे, इस दृष्टि से व्यस्त रखने के लिए कोई न कोई काम देना ही चाहिए।
सब सरकारें अपने स्तर पर जमकर काम कर रही है और उसी का परिणाम है कि दुनिया के अन्य देशों की तुलना में हमारे यहां पर इस महामारी का प्रसार अत्यंत सीमित है। यह सब कुछ बैठे-बैठे नहीं हुआ है, शासन प्रशासन के प्रयत्नों से ही हुआ है, इसलिए बार-बार यह कहने कि बजाय कि "हम यह कर रहे हैं... हम वह कर रहे हैं... अब यह करने जा रहे हैं... हम ऐसा करने वाले हैं... हम देख रहे हैं... हम देख चुके हैं.... हम देखने वाले हैं...।" यह सब नहीं कह कर उनको जो करना है पूरी ईमानदारी से निष्ठा से कर रहे हैं ।
आइए सब मिलकर इसे सफल बनाएं
रविवार 05.04.2020 रात 9 बजे हम सभी एकता व सकारात्मकता का एक दीपक प्रज्ज्वलित करें।
शुभं करोति कल्याणम् आरोग्यम् सुख सम्पदाम्।
द्वेष बुद्धि विनाशाय दीपज्योति नमोऽस्तु ते।।
"प्रकाश पर्व "
✍️
संदीप जोशी, जालोर
3 अप्रेल, 2020
(लेखक राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद के सदस्य है। )
और आमजन को भी मनोवैज्ञानिक संबल मिलता रहे, इस दृष्टि से कुछ ना कुछ काम लगातार दे रहे हैं। यह अच्छा ही है। कोई भी संगठन हो बिना कार्यक्रम के लंबा नहीं चल सकता। कितना भी अच्छा कार्यकर्ता हो बिना कार्यक्रम के अथवा बिना काम के कुंठित हो ही जाएगा, अतः संगठन के अस्तित्व के लिए कार्यक्रम और कार्यकर्ता दोनोंआवश्यक है। इसलिए माननीय प्रधानमंत्री जी का यह आह्वान "कार्यक्रम से कार्यकर्ता निर्माण" जैसा ही है।
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