चांदी का चम्मच लेकर पैदा हुआ एक शख़्स, जिसके परदादा, दादी और पिता देश के प्रधानमंत्री रहे, सत्ता में रहते सिर्फ फायदा कमाना और फायदा उठाना ही जिनका काम रहा, जिनकी गणित और इकोनॉमिक्स सिर्फ "फायदे" की केलकुलेशन ही जानती थी, वो गत 6 साल से सत्ता वियोग में अब देश के सैनिकों के शोणित में "फायदा" ढूंढ रहे है।
ये शख्स जब "पॉवर" में था, देश का एक भी हिस्सा आतंकी हमलों से अछूता नहीं था, एक भी दिन ऐसा नहीं गया जिस दिन जवानों के बलिदान की खबर न आई हो। विपक्ष आतंकियों और उनके आका पाकिस्तान पर कार्यवाही की मांग करता रहा लेकिन इस शख्स की सरकार ने कार्यवाही नहीं की। शायद कार्यवाही करना इन्हें "फायदे का सौदा" नहीं लगा होगा।
दिल्ली के बाटला हाउस के एनकाउंटर में जब आतंकी मारे जाते है तो इस शख्स की माँ आतंकियों की लाशें देख रो पड़ती है लेकिन उसी महिला के आंसू उसी एनकाउंटर में श्री मोहनचंद शर्मा के बलिदान पर नहीं बहते, शायद इसीलिए की ये "फायदे का सौदा" नहीं लगा होगा।
संसद हमले के अपराधी अफ़ज़ल गुरु को फांसी देने की मांग को लेकर संसद में बलिदान देने वाले जवानों के परिवारजन रोते बिलखते रहते लेकिन फांसी का फैसला सालों तक टलता रहता है क्योंकि एक आतंकी को फांसी देना इनके लिए "फायदे का सौदा" नहीं था।
जिस 26/11 के हमले में पाकिस्तान का हाथ होना पूरा विश्व मान रहा था सिर्फ पाकिस्तान को बचाने के लिए उसी हमले को कसाब के हाथों में बंधे कलावे के कारण "RSS की साज़िश" बता रही थी क्योंकि हमले में पाकिस्तान नाम आना इनके लिए "फायदे का सौदा" नहीं था।
सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत और मारे गए आतंकियों की संख्या मांगने वाले इस शख्स की सरकार के दौरान देश के बहादुर सैनिक लांस नायक श्री हेमराज का सिर काटकर पाकिस्तानी ले गए थे, लेकिन पाकिस्तान से कार्यवाही तो दूर तब की सरकार कठोर आवाज में पाकिस्तान को संदेश तक नहीं देते थे क्योंकि इन लोगों के लिए ये "फायदे का सौदा" नहीं था।
ये वही शख्स है जो कभी अपने पिता की हत्या का आरोप जिस दल पर लगाते थे अब उन्हीं के साथ गठबंधन जोड़े बैठे है क्योंकि पिता की हत्या के गम को याद रखना इनके लिए "फायदे का सौदा" नहीं है।
हर चीज को प्रॉफिट और लॉस की नज़र से देखने वाले इस शख्स के लिए देश, देशभक्ति, स्वाभिमान जैसे शब्द बेमानी है क्योंकि ये सब इसके लिए "फायदे का सौदा" नहीं है।
Today as we remember our 40 CRPF martyrs in the #PulwamaAttack , let us ask:— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) February 14, 2020
1. Who benefitted the most from the attack?
2. What is the outcome of the inquiry into the attack?
3. Who in the BJP Govt has yet been held accountable for the security lapses that allowed the attack? pic.twitter.com/KZLbdOkLK5
✍️निखिल व्यास




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