श्री संदीप जोशी; एक शिक्षक जिन्होंने अपने विचारों एवं नवाचारों से शिक्षा जगत में नवक्रान्ति संचार किया। बस्ते का बोझ कम करने से लेकर कन्या पूजन एवं भारत दर्शन गलियारा जैसे कई अभिनव प्रयोग जिनके जरिये शिक्षक श्री संदीप जोशी ने छात्रों को शिक्षा के साथ साथ देश की मिट्टी से भी जोड़ा।
राजस्थान के सुदूर किसी गांव की सरकारी उच्च प्राथमिक स्कूल में पढ़ाने वाले अध्यापक के बारे में किसी को कुछ लिखना हो तो एक लाइन की कहानी ध्यान आती है- सुबह स्कूल जाना, प्रार्थना के बाद कक्षा में बच्चों को पढ़ाना और वापस घर आना। इस बीच अपने अध्यापक मित्रों से TA-DA, इंक्रीमेंट इत्यादि की Interesting डिबेट! अमूमन एक सरकारी शिक्षक के जीवनचर्या कुछ ऐसी ही रहती है। लेकिन जब शिक्षक संदीप जोशी जैसे हो तो एक पूरा ग्रंथ लिखा जा सकता है।
शिक्षक संदीप जोशी द्वारा अपने शैक्षणिक नवाचारों की शुरुआत अपने विद्यार्थियों के दर्द को समझते हुए की जब उन्होंने छोटे छोटे बच्चों के कंधों पर लादा जाने वाला बस्ते का बोझ कम करने केे लिए "ज्ञानकोष" का निर्माण किया।
क्या है "ज्ञानकोष"
छात्र- अभिभावक- शिक्षक- शिक्षाविद..... विद्यार्थियों के बस्ते के बोझ से सभी परेशान है। इस बोझ को कम करने के लिए शिक्षक संदीप जोशी ने वर्ष 2007-08 में इस समस्या का एक सरल समाधान सबके सामने रखा। एक नई संकल्पना मासिक पाठ्य पुस्तकों की।शिक्षक संदीप जोशी की परिकल्पना के अनुसार प्राथमिक स्तर पर महिनानुसार किताब बनाई जाए। एक या दो महीने की एक किताब जिसमे सभी विषय के उस महीने में पढ़ने वाले पाठों का संग्रह हो। All in one...
इन मासिक पाठ्यपुस्तकों का नाम सुझाया - ज्ञानकोष। पाठ्यपुस्तकों का स्वरूप बदल कर सुझाव प्रस्तुत किया।
इस मकसद को लेकर शिक्षक जोशी गत 12 वर्षो से लगातार प्रयासरत है एवं इस आईडिया को व्यापक चर्चा का विषय बनाया है। वर्तमान में अनेक निजी विद्यालयों ने इसे अपनाया है। अनेक निजी प्रकाशकों ने इसके अनुसार पुस्तक छापना शुरू किया है। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग एवं एनसीईआरटी द्वारा बस्ते के बोझ की समस्या के समाधान के लिए आयोजित एक राष्ट्रीय स्तर की बैठक में शिक्षक श्री संदीप जोशी को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया । देश के विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ शिक्षा अधिकारियों के सामने इन्होंने बस्ते के बोझ की समस्या के समाधान के लिए अपने दो सुझाव मासिक पाठ्यपुस्तक एवं शनिवार को बस्ता मुक्त पढ़ाई प्रस्तुत किए। सभी ने इन उपायों को सार्थक बताया। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने द्वेमासिक पाठ्य पुस्तकें प्रकाशित करने की घोषणा की है । इससे देश भर के प्राथमिक कक्षाओं के करोड़ों विद्यार्थियों को बस्ते के भारी-भरकम बोझ से मुक्ति मिलेगी। लंबे प्रयासों बाद वर्ष 2019 से राजस्थान सरकार ने मासिक पाठ्य पुस्तक वाला यह सुझाव लागू किया है।
व्यापकता एवं प्रभाव क्षेत्र-
राज. राज्य में प्राथमिक कक्षाओं के लगभग 35 लाख बच्चो के कंधों से बस्ते के बोझ कम हुआ। केंद्रीय स्तर पर लागू होने से CBSE से जुड़े एवं केंद्रीय विद्यालयों के प्राथमिक कक्षाओं के लाखों विद्यार्थी लाभान्वित होंगे।
शिक्षक जोशी द्वारा शिक्षा क्षेत्र में किया दूसरा बड़ा प्रयोग रहा कन्या पूजन।
निर्भया कांड के बाद से देश में बलात्कार, भ्रूण हत्या, छेड़छाड़, लिंगभेद, लैंगिक अत्याचार एवं महिलाओं के खिलाफ होने वाले अत्याचारों की खबरों में बढ़ोतरी के बीच बालमन में कन्या के प्रति मन मे श्रद्धाभाव विकास कर नारी में माँ एवं बहन की छवि देखने का भाव विकसित करने के उद्देश्य से स्कूलों में पढ़ने वाली छात्राओं का नवरात्रि एवं अन्य उपयुक्त प्रसंगों पर विद्यालय के शिक्षक, छात्रों एवं ग्रामवासियों द्वारा कन्यापूजन का कार्यक्रम विद्यालय में आयोजित करने के साथ शुरू हुआ यह अभिनव प्रयोग विगत 5 वर्षों से लगातार चलते हुए आज विराट स्वरूप ले चुका है। वर्ष 2019 में ही राजस्थान के सभी 33 जिलों में आयोजन 1500 विद्यालयो में आयोजन हुआ जिसमें सवा दो लाख छात्र सहभागी- लगभग 22000 शिक्षक जुड़े।
शिक्षक जोशी के अनुसार कन्यापूजन धार्मिक आयोजन न होकर एक मनोवैज्ञानिक शिक्षण है जिसके जरिये नारी सम्मान का प्रायोगिक ज्ञान देने का प्रयास किया गया है। इस कार्यक्रम को राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत एवं केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री श्री रमेशचन्द्र पोखरियाल ने भी इस प्रयास को सराहा है। यह बाल मन को विकृतियों से बचाने का एक सार्थक प्रयास है। समाज एवं शासन दोनों की मान्यता मिल रही है ।
एक ऐसा ही प्रयोग और किया गया शिक्षकजोशी द्वारा - आनंददायी शनिवार या बेग फ्री सेटरडे
सरकारी-निजी कार्यालयों के 5 day week की तर्ज पर शनिवार को स्कूल में बस्ते की छुट्टी कर आनंददायी तनाव मुक्त शिक्षा के लिए एक विशिष्ट प्रयोग शुरू किया गया। इस एक दिन बिन बस्ते पढ़ाई होती है। इस हेतु बिना पाठ्यपुस्तकों के पढ़ाये जाने योग्य विषय चयनित कर आठ कालांश का पाठ्य सामग्री बनाई गयी।
वर्तमान में देश भर के केंद्रीय विद्यालयों में यह योजना लागू हो चुकी है एवं 10 से अधिक राज्यो में यह योजना लागू की गई है। इन केंद्रीय विद्यालयो एवं राज्यो के विद्यालयो में पढ़ने वाले 70 लाख से अधिक विद्यार्थी लाभान्वित हो रहे है। राजस्थान में इसे जॉयफूल सेटरडे कहा जा रहा है केंद्रीय विद्यालयों में फन डे तो कहीं कहीं आनंदवार नाम दिया गया है।
रचनात्मकता का एक और बेहतरीन उदाहरण एवं बिना पैसे का नवाचार रहा कक्षाकक्ष जय भारत से उपस्थिति
इस देश में अंग्रेज देश छोड़ गए लेकिन उनके द्वारा शुरू किया "जी-हुजूर" वाली प्रथा आज भी कक्षा कक्षों में "यस सर-प्रजेंट सर" के रूप में बदस्तूर जारी है। इसी का समाधान शिक्षक जोशी ने कक्षाओं में होने वाली उपस्थिति में देश भक्ति के संस्कार देने के लिए "जय भारत" या "जय हिंद" से उपस्थिति दर्ज करवाने का प्रयोग शुरू किया गया।
शिक्षक जोशी ने बताया कि सामान्यतया बालक यस सर का उच्चारण करते है। इसमे केवल जी हुजूरी को भाव है। औसतन 10 वी तक पढ़ने वाला छात्र अपने जीवन मे लगभग एक लाख बार यस सर को बोल और सुन लेता है। इसी की जगह जय भारत के साथ उसमें राष्ट्रभक्ति का भाव जागृत होगा।
शिक्षक जोशी के इस सुझाव को सैकड़ो शिक्षको ने प्रयोग में लाना शुरू किया है। गुजरात और मध्यप्रदेश की सरकार ने राज्य के सभी शिक्षण संस्थानों में इसे लागू किया है। वर्तमान में गुजरात एवं MP समेत सैकड़ो विद्यालयों में लाखों छात्र जी हुजूरी के संस्कार यस सर के स्थान पर जय भारत बोलकर उपस्थिति दर्ज करवाते है।
इन सब के अलावा शिक्षक श्री संदीप जोशी के अन्य नवाचार, इनमें से कुछ विद्यालय स्तर के है तो कुछ नवाचारों को बहुत बड़ी संख्या में अन्य शिक्षको ने भी अपनाया है-
- स्वास्थ्य गलियारा
- समरसता सरस्वती मंदिर
- प्रतिदिन भारत वंदन
- विद्यालय स्तर पर विज्ञान वाटिका एवं बोटेनिकल गार्डन
- शिक्षा नाद योजना
- शबरी महोत्सव
- राष्ट्रीय पर्व पर ग्रामवासियो से भारत पूजन
- विद्यालयों में दीपोत्सव- दीपावली की रात विद्यार्थी घर से अभिभावक के साथ एक एक दीपक लेकर आते है।
- दीपावली गृहकार्य में वैशिष्ट्य
- विद्यालयो में तुलसी वृंदावन
- क्लिप बोर्ड पर देशभक्ति
- प्राथमिक कक्षाओं की पुष्प प्रदर्शनी
- इतिहास शिक्षण में प्रायोगिक कार्य
- प्रार्थना में नियमित पर्यावरण संकल्प- मासिक पर्यावरण संकल्प
- स्कूल ट्यूरिज्म
- शब्द मित्र यंत्र
- गृह कार्य जांच में पुस्तकालय प्रयोग
- पुरस्कार राशि में बच्चो का सहभाग
- ग्राम गौरव गान लिखना
- विद्यार्थियों के जन्मदिन पर आयु के अनुसार दीप प्रज्वलन
- पूर्व विद्यार्थियों द्वारा अन्य राज्यो में राष्ट्रीय पर्व पर भारत पूजन
- विद्यार्थियों की कॉपी किताब के लिए संस्कारक्षम सार्थक स्टिकर
- प्रार्थना सभा मे ध्यानयोग एवं मासिक गीत
उक्त समस्त नवाचारों के लिए शिक्षक श्री संदीप जोशी को बधाई एवं शुभकामनाएं की वे भविष्य में ऐसे ही नवाचारों से देश की शिक्षण व्यवस्था में सकारात्मक परिवर्तन एवं परिणाम लाते रहे।
-निखिल व्यास








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