"छत्रपति शिवाजी महाराज" शब्द नहीं मंत्र हैं
आज के दिन की पावनता और पवित्रता से राष्ट्र की भावी पीढ़ी को अवगत करवाना प्रत्येक भारतीय का पुनीत कर्तव्य हैं। आज ही वो दिन है जब हिन्दू साम्राज्य के स्वप्न के साथ महान हिन्दू शासक छत्रपति शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक हुआ था। परिणामस्वरूप औरंगज़ेब की सम्पूर्ण हिन्दुराष्ट्र पर शासन करने की अभिलाषा कपोल-कल्पना बनकर रह गयी।
यूँ तो छत्रपति शिवाजी महाराज वर्षो से हमारे लिए प्रेरणास्त्रोत बने हुए हैं। लेकिन वर्तमान परिस्थितियों मे उनके विचारों का महत्व औंर अधिक बढ़ जाता हैं। आज जब प्रधानमंत्री जी "आत्मनिर्भर भारत" की बात करते हैं तो हममें से अनेक उनके विचारों का मख़ौल उड़ाते नज़र आते हैं। स्मरण रहे, यदि हमारे ही जैसी प्रजा से छत्रपति शिवाजी घिरे होते तो हमारी मातृभूमि अपना अस्तित्व गवां बैठती।
वर्तमान परिस्थितियाँ भी हिन्दुस्थान का भविष्य निर्धारित करने वाली हैं। निर्णय हमें लेना हैं- हमारी मेहनत की कमाई हमारे राष्ट्र को दासता की बेड़ियों मे जकड़ने हेतु प्रयुक्त हो/देश के सैनिकों पर दुश्मनों की गोलियाँ बनकर बरसे अथवा राष्ट्रनिर्माण हेतु।
अपने सुप्रसिद्ध पत्र मे शिवाजी महाराज, जयसिंह को चेताते हैं की किस प्रकार औरंगज़ेब, एक सिंह (शिवाजी महाराज) को दूसरे सिंह (जयसिंह) से लड़वाना चाहता हैं। कुछ ऐसी ही कूटनीतिक चाल चीन चलता आया हैं- हिन्दुस्थान की कमाई को हिन्दुस्थान के विरुद्ध प्रयुक्त कर के।
ज्ञातव्य हैं की भारत, चीन के लिए सबसे बड़ा उपभोक्ता बाजार हैं। यदि प्रत्येक हिंदुस्थानी चीन निर्मित वस्तुओं के बहिष्कार को प्रतिबद्ध हो तो चीन का घुटनों पर आना तय हैं। इसी कारण चीन वैश्विक बाज़ार मे अपना अस्तित्व बनाये रखने हेतु "डंपिंग" नामक कूटनीतिक अस्त्र का प्रयोग करता आया हैं। डंपिंग से अभिप्राय, किसी देश के निर्माता द्वारा किसी उत्पाद को या तो इसकी घरेलू कीमत से नीचे या इसकी उत्पादन लागत से कम कीमत पर किसी दूसरे देश में निर्यात करने से हैं। सरल शब्दों मे समझे तो इसका अर्थ हैं वस्तु को सस्ते दाम पर बेचना। चीन ऐसा कर हमारे घरेलू उद्योगों को बर्बाद कर हिन्दुस्थान के वस्तु-बाज़ार मे एकाधिकार स्थापित कर, अंततः अधिसामन्य लाभ कमाने का अभिलाषी हैं।
क्या हम चीन की यह चाल समझने मे अक्षम हैं? क्या हमें चीनी-दासता स्वीकार्य हैं?
यदि नहीं तो आज हिन्दू साम्राज्य दिवस के अवसर पर प्रत्येक राष्ट्रभक्त संकल्प ले की स्वदेशी वस्तुओं के उपभोग को वरीयता देंगे व चीन-निर्मित वस्तुओं का बहिष्कार करेंगे। विश्वास रखें हमारे इस एक संकल्प से स्वर्णिम भारत का गौरवमयी इतिहास पुनः लौटकर आयेगा औंर हिन्दुस्थान पुनः "सोनें की चिड़िया" कहलाएगा।
लेखिका
विनीता राजपुरोहित
सहायक आचार्य, अर्थशास्त्र
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