भारत सरकार द्वारा टिकटोक समेत 59 चीनी apps पर बैन लगाने के फैसले का चहुँओर से स्वागत हो रहा है। इन apps के विकल्प के रूप में कई भारतीय apps उभर कर आ रही है। चीनी वस्तुओं के बहिष्कार का असर भी पूरे देश में देखा जा सकता है। इसका सबसे बुरा प्रभाव चीनी मोबाइल कम्पनियों पर पड़ा है। Xiomi को तो अपने स्टोर्स पर Made in India के बैनर लगा अपना ब्रांड name छुपाना पड़ा है।
महाभारत काल के प्रसंग वयं पंचाधिकं सतम ध्येय वाक्य को ध्यान में रखकर देश की जनता चीनी वस्तुओं के बहिष्कार पर एकमत हो रही है।
कन्फडरेशन आॅफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) द्वारा 19 जून से 27 जून के मध्य देश में विभिन्न वर्गों के बीच चीन निर्मित वस्तुओं के बहिष्कार के सम्बन्ध में पूछे गए प्रश्नों के प्रत्युत्तर में शत प्रतिशत (अपवाद को छोड़कर) लोगों ने चीनी वस्तुओं के बहिष्कार का समर्थन किया है।
विभिन्न वर्गों (व्यापारियों, किसानों, उपभोक्ताओं, महिलाओं, विधार्थी व सामाजिक संगठनों) से सर्वे में चीन के साथ चल रहे वर्तमान हालात से संबंधित नौ प्रश्न भी पूछे गए थे,सर्वे में भाग लेने वाले लगभग सभी वर्गो ने चीन के प्रति आक्रोश प्रकट करते हुए, चीन के विरुद्ध और आक्रामक कार्यवाही का समर्थन किया। कैट के इस सर्वे से यह साफ प्रकट होता है कि इस मुद्दे पर सारा देश चीन के खिलाफ एकजुट होकर खड़ा है और किसी भी कीमत पर अब चीन को सबक सिखाना चाहता है।
इस सर्वे में शामिल लोगों में से 97.8 प्रतिशत लोगों ने यह संकल्प भी लिया कि वह चीनी सामान न खरीदेंगे और न ही बेचेंगे। इसके अलावा अन्य सवालों के जवाब भी लगभग भारत सरकार की वर्तमान नीति को ही पुष्ट करते हैं।
इस सर्वे से उत्साहित होकर कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि सर्वे के नतीजों से कैट को अब और अधिक आक्रामकता के साथ देशभर में चीनी वस्तुओं के राष्ट्रीय अभियान 'भारतीय सामान -हमारा अभिमान' को चलाने को बल मिलेगा।
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गंगा सिंह राजपुरोहित
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