"पूज्य बालासाहेब देवरस को विनम्र श्रद्धांजलि"
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| स्व. श्री बाला साहेब देवरस |
"अस्पृश्यता यदि पाप नहीं तो,दुनिया में कुछ भी पाप नहीं है।" के सार्वभौमिक उद्घोष से अस्पृश्यता के उन्मूलन के लिए दृढ़ संकल्पित श्री मधुकर दत्तात्रेय देवरस उपाख्यां बालासाहेब देवरस हिंदु समाज को संगठित करने के साथ साथ समाज में व्याप्त कुरीतियों, विषमताओं और अभावों को दूर करने वाले संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तृतीय सरसंघचालक रहे, पूज्य बालासाहेब देवरस का जन्म 11 दिस.1915 को नागपुर में हुआ था।
कुशाग्र बुद्धि के मधुकर संघ की स्थापना के समय से ही संघ के प्रति समर्पित रहे, विभिन्न दायित्वों का निर्वहन करते हुए 6 जून 1973 को पूज्य गुरूजी के देहावसान के बाद सरसंघचालक जैसे गुरु तर दायित्व का भी आपने सफलता पूर्वक निर्वहन किया।
प्राग प्रसिद्धि से दूर रहने वाले बालासाहेब ने संघ के कार्यक्रमों में आद्य सरसंघचालक एवं गुरूजी के चित्रों के साथ अपना चित्र लगाने से स्पष्ट रूप से मना कर दिया था! 1975 में संघ पर लगे प्रतिबंध का धैर्य एवं निडरता से सामना किया, आपातकाल के दौरान पुणे जेल में रहते हुए सत्याग्रह और फिर चुनाव के माध्यम से देश को इंदिरा/फिरोजखान की तानाशाही से मुक्त कराने में अहम भूमिका निभाई! आपदा के समय निर्धन बस्तियों एवं जरूरत मंदों की सेवा के लिए विख्यात सेवा भारती संगठन की स्थापना आपकी सत्प्रेरणा से हुई थी।
कठोर साधना युक्त जीवन जीते हुए बालासाहेब आज ही के दिन (17 जून 1996) को नश्वर देह त्याग कर देवलोक को गमन कर गए! अशिक्षा व विकास से वंचित वनवासी वर्ग को ईसाईयों के षडयंत्रों से बचाने व समाज में व्याप्त विषमता/छुआछूत को जड़ मूल नष्ट करने की जिम्मेवारी का ईमानदार से निर्वहन कर हम उस महामानव को सच्ची ऋद्धांजलि दे सकते है!
लेखक
गंगासिंह



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