अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आगामी 24 फरवरी को भारत आएंगे। वे अहमदाबाद, आगरा एवं दिल्ली जाएंगे। इस पूरे दौरे में सबसे बड़ा आकर्षण अहमदाबाद में होने वाला कार्यक्रम "केम छो ट्रम्प" होगा। इन सब के बीच मोदी से स्थाई रूप से नाराज रहने वाली "मीडिया लॉबी" अहमदाबाद में चल रहे छोटे मोटे कार्यों को भी ट्रम्प के दौरे से जोड़ मोदीजी को कोसने का अपना मौलिक कर्तव्य पूर्ण कर रही है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का भारत दौरा तय होने से पहले जिस दीवार का बनना तय हो चुका था उसे लेकर आजकल राजनीति चरम पर है। विपक्षी कह रहे है कि मोदी देश की गरीबी छुपा रहे है। कुछ कह रहे है जिस राज्य में इतने सालों तक भाजपा सत्ता में रही वहां झुग्गी-झोपड़ी कैसे है। इस बारे में अहमदाबाद महानगर पालिका के कमिश्नर विजय नेहरा अपना पक्ष भी रख चुके है लेकिन देश की कथित "लिबरल" मीडिया को वही बात पसंद है जो उनके नरेटिव को सूट करें।
मैं धन्यवाद देना चाहता हूँ उन विपक्षियों को की उन्होंने भाजपा पर ये विश्वास जताया कि भाजपा के राज में भले अपवाद स्वरूप ही हो लेकिन झुग्गी-झोपड़ी क्यों है।
मैं उन्हें विश्वास दिलाता हूँ कि आने वाले 4 सालों में एक भी गरीब झुग्गी झोपड़ी में न रहे इसी लिए मोदीजी PM आवास योजना लाए है जिसके जरिये वे हर गरीब को घर देने का अपना वादा पूरा करने में लगे है।
मुझे अच्छा लगता कि अहमदाबाद की उस झुग्गी झोपड़ी को लेकर चिंतित मेरे विपक्षी मित्र मोदीजी को कहते कि "आप ट्रम्प को हमारे राज्य में ले आइए, हमारी सत्ता वाले राज्य में एक भी झुग्गी झोपड़ी नहीं है।" मुझे अच्छा लगता कि वे विपक्षी मित्र भाजपा वालो चैलेंज करके कहते कि "दम है तो हमारे शासन वाले राज्यों में एक भी झुग्गी झोपड़ी ढूंढ के बता दो।"
काफी विपक्षी मित्र कह रहे है कि ट्रम्प के स्वागत में जितने करोड़ रुपए खर्च हुए इतने में से कई युवाओं को रोजगार मिल सकता था। मुझे नहीं पता इन लोगों के रोजगार की परिभाषा क्या है? उन्हें कौन समझाए की ये रुपए यदि निर्माण में खर्च हुए तो वहां के मजदूरों को भी रोजगार मिला होगा, कारीगरों को भी और इंजीनियरों को भी। यदि कहीं कोई पेंटिंग बनी है तो पेंटर को भी रोजगार मिला होगा।
"दीवार" को लेकर सियासत करने वालों का मोदी और ट्रम्प, दोनों से पुराना खाता है। मोदी की हार देखने को आतुर रहे ये लोग ट्रम्प की जीत पर भी नाखुश ही थे। मोदी और ट्रम्प से इनकी "खुन्नस" की वजह है दोनों नेताओं का राष्ट्रप्रेम। ये दोनों नेता "राइट विंग" वाले माने जाते है जिन्हें देख "लेफ्ट विंग" का पेट दर्द शुरू हो जाता है।
वैसे मोदीजी भी चाहते तो अपने मुल्क की गरीबी दिखा अमेरिका से खैरात प्राप्त कर सकते थे जैसा कि "सपेरों की बीन" सुना पहले के प्रधानमंत्री करते रहे थे। लेकिन मोदी को देश के लिए खैरात नहीं देश में निवेश चाहिए।
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निखिल व्यास



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