निकाय चुनावों का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव अर्थात निकाय प्रमुख का चुनाव आगामी 26 नवम्बर को होना है। 21 नवम्बर दोपहर 3 बजे तक उम्मीदवारों द्वारा नामांकन दाखिले के बाद अगले दिन जांच प्रकिया एवं उसके बाद नामांकन वापिस एवं सिम्बल अलॉटमेंट की प्रक्रिया न केवल उन प्रत्याशियों के लिए बल्कि जनता के लिए भी बेहद रोमांचक रहने वाली है।
पाली नगर परिषद में इस बार भी किसी दल को स्पष्ट बहुमत न मिलना एवं निर्दलीयों की दोनों दलों में हो रही पूछ के बाद जनता में धनबल एवं अन्य प्रलोभनों के इस्तेमाल के चर्चे आम है।
29 पार्षदों एवं कुछ बागियों के सहारे जहां भाजपा का दावा इस पद के लिए बेहद मजबूत है वहीं 22 पार्षदों के साथ कांग्रेस नेता निर्दलीयों को लुभाने एवं भाजपा में प्रत्याशी चयन बाद कि संभावित फूट पर नज़र बनाए हुए है।
पार्षद चुनावों के परिणाम के बाद जहां भाजपा की तरफ से भाजपा जिला उपाध्यक्ष सुरेश चौधरी की पत्नी श्रीमती उषा चौधरी की दावेदारी सबसे मजबूत है वहीं विधायक से अपनी नज़दीकी के चलते वर्तमान उपसभापति मूलसिंह भाटी अपनी पत्नी श्रीमती सुखियाँ कंवर को इस पद पर बिठाने हेतु जूटे है। वहीं पूर्व कार्यवाहक सभापति,भाजपा जिला महामंत्री एवं सांसद प्रतिनिधि राकेश भाटी भी सांसद एवं विधायक की नजदीकी के चलते अपनी पत्नी को सभापति बनाने के लिए प्रयासरत है। लेकिन इन तीनों उम्मीदवारों की आपसी फूट में किसी नए चेहरे के उभरने की स्थिति में पिछले बोर्ड के सबसे सक्रिय भाजपा पार्षद किशोर सोमनानी की पत्नी श्रीमती पुष्पा सोमनानी का नाम भी आने की संभावना प्रबल है।
इसी तरह कांग्रेस में भी नेताओं की लॉबिंग शीर्ष स्तर तक चल रही है। पाली कांग्रेस के दो प्रमुख ग्रुप अपने अपने उम्मीदवारों के आलाकमान को सिफारिशें कर रहे है। हालांकि 22 सीटों वाली कांग्रेस की डगर बेहद कठिन है लेकिन भाजपा के अंतर्विरोध एवं कांग्रेस नेता मोटूभाई की पत्नी श्रीमती मोहिनी देवी के नजदीकी मुकाबले में चुनाव हारने के बाद अब कांग्रेस से पूर्व सभापति प्रदीप हिंगड़ की बहू (भतीजे की पत्नी) श्रीमती नेतल मेवाड़ा एवं वर्तमान बोर्ड में नेता प्रतिपक्ष भंवर राव की पत्नी श्रीमती राधा राव के बीच ही उम्मीदवारी की जंग बची है। पूर्व सांसद बद्री जाखड़ की सक्रियता ने कहीं न कहीं कांग्रेस के दोनों ध्रुवों में सामंजस्य बैठाने का प्रयास धरातल पर नज़र जरूर आ रहा है लेकिन धरातल पर यह प्रयास कितना उपादेय होता है ये 26 नवम्बर को ही पता चल पाएगा।
जानकार सूत्रों के मुताबिक दोनों दलों के प्रमुख नेता निर्दलीयों के साथ साथ एक दूसरे के दलों में नए चुने पार्षदों से भी संपर्क कर रहे है। चर्चा यह भी है कि सभापति उम्मीदवारी में अपनी पत्नी का नाम न आने पर नेताओं ने क्रॉस वोटिंग तक का मन बना लिया है। वहीं एक पार्षद ने अपनी पत्नी को सभापति का निर्दलीय फॉर्म भराने का भी मन बना लिया है।
कांग्रेस जहां कम सीटें आने के बावजूद येन केन प्रकारेण बोर्ड बनाने को प्रयासरत है वहीं भाजपा की सबसे बड़ी समस्या अपने नेताओं को "कुर्सी के मोह त्याग" हेतु तैयार करना है।
इन सब घटनाक्रम के बीच पाली की सोशल मीडिया भी अपने अपने अंदाज में इस घटनाक्रम के मजे ले रही है। कुछ ऐसी ही मजेदार फेसबुक पोस्ट्स-
इन सबसे एक बात स्पष्ट है, जनता सब जानती है....
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शानदार आंकलन , सटीक व्याख्यान
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