चीन से आक्रोशित विश्व समुदाय
चीन की विस्तार वादी नीतियों से परेशान पूरा वैश्विक समुदाय अपने अपने स्तर पर चीन को घेरने का प्रयास कर रहा हैं।
पूर्वी लद्दाख में चीन द्वारा भारत के पीठ में छुरा घोंपने के षड्यंत्र का समुचित प्रत्युत्तर देने के लिए भारत द्वारा भी सैन्य व कूटनीतिक विकल्पों के साथ-साथ आर्थिक मोर्चे पर भी सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।
चीन पर आर्थिक निर्भरता कम करने के लिए व्यापक योजनाऐं बनाई जा रही है। इसके तहत चीन से होने वाले व्यापार,निवेश और प्रोजेक्ट सर्विसेस पर भी लगाम लगाने की तैयारी की जा रही है। सरकारी ठेकों और इन्फ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र की परियोनाओं में चीन की कंपनियों के भाग लेने पर प्रतिबंध लगाने पर विचार किया जा रहा है।
चीन से आने वाले तैयार माल पर भारी टैक्स लगाऐ जा रहे है। इसके साथ ही विभिन्न देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों की भी समीक्षा की जा रही है,चीन से आयात कम करने के लिए भारत के पास उपलब्ध विकल्पों में से एक हाई टैरिफ/नॉन-टैरिफ उपायों पर भी विचार हो रहा हैं।
भारत के मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार में चीन की कंपनियों की बड़ी हिस्सेदारी पर रोक लगाने के लिए भारतीय जन समुदाय, स्वयं सेवी संगठन, औद्योगिक संगठन भी पूरी तरह से उद्वेलित है तो दूसरी तरफ सरकार चीन द्वारा निर्मित सामान पर सख्त क्वालिटी स्टेण्डर्ड नियम लागू करने व घरेलू कंपनियों को भी प्रोत्साहन देने वाली नीतियों पर विचार कर रही है।
हमेशा शांत रहने वाले भारतीय प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी सोशल मीडिया पर "चीन और चीनी उत्पादों का बहिष्कार" का अभियान चलाकर भारत सरकार को चीन के सम्पूर्ण बहिष्कार का आव्हान कर रहे हैं!
लेखक
गंगा सिंह
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