अपने इस्लामिक वोटबेंक को खुश करने के चक्कर में अफ़ज़ल गुरु, याकूब मेमन और बुरहान वानी जैसे दुर्दांत आतंकियों को “भटका हुआ” और “वक़्त का मारा” type संज्ञा देने वाले “सेक्युलर दल” येन केन प्रकारेण हिन्दुओं को “आतंकवादी” साबित करने में जुटे रहते हैं।
चाहे वो 26/11 का हमला हो या मालेगांव ब्लास्ट या हाल ही में शाहीनबाग में हुआ गोलीकांड, इस देश के कथित सेक्युलर दलों ने तनिक भी देर नहीं लगाई हिन्दुओं को आतंकवादी ठहराने में। हालांकि ये वहीं दल है जो विश्व भर में फैले इस्लामिक आतंकवाद पर अपने मुंह में दही जमा लेते है।
देश के गृहमंत्री रहते चाहे वो सुशील कुमार सिंदे हो या पी. चिदम्बरम, देश में लगातार हो रहे बम विस्फोटों और आतंकी हमलों पर लगाम लगाने में जहां विफल रहे वहीं हर हमले के बाद वे किसी न किसी तरह आतंकवाद को हिन्दुओं और हिन्दुओं को एकजुट कर राष्ट्रसेवा में समर्पित करने वाले संगठन, आरएसएस, से जोड़ने की हरसंभव कोशिश करते रहे। सुशील कुमार सिंदे ने तो सदन में “हिन्दू आतंकवाद” का नाम लेकर हिन्दुओं को बदनाम करने की कोशिश की थी। हालांकि “इस्लामिक आतंकवाद” पर इनका सिर्फ एक ही वाक्य निकल पाता है-“आतंक का कोई धर्म नहीं होता!”
चाहे वो कर्नल पुरोहित हो या साध्वी प्रज्ञा ठाकुर, कांग्रेस ने हर सम्भव कोशिश की देश के हिन्दुओं को बदनाम करने की।
कांग्रेस नेता दिग्विजयसिंह ने 26 नवम्बर, 2008 को मुंबई पर हुए भयानक आतंकी हमले में पकड़े गए आतंकी कसाब के हाथ पर बंधे कलावे के सहारे आरएसएस और हिन्दुओं को आतंकी साबित करने के लिए पूरी किताब ही लिखवा डाली। किताब का नाम था “आरएसएस की साज़िश-26/11"
ये वो दौर था जब दिग्विजयसिंह की सरकार में तूती बोलती थी। मध्यप्रदेश की जनता ने उन्हें भले सत्ता से बाहर कर दिया था लेकिन सोनिया गांधी की चापलूसी के सहारे उनकी दुकान अब भी चल रही थी।
ऐसा ही एक मामला था हैदराबाद की मक्का मस्जिद में 18 मई, 2007 को हुए बम विस्फोट का। हैदराबाद में बड़ी संख्या में इस दिन लोग शुक्रवार की नमाज अता करने पहुंचे थे। 400 साल पुरानी इस मस्जिद में तभी एक शक्तिशाली पाइप बम ब्लास्ट हुआ जिसमें नौ लोगों की मौत हुई और 58 लोग घायल हुए थे।
कुछ समय पहले इस मक्का मस्जिद बम विस्फोट मामले में आंध्रप्रदेश और तेलंगाना हाईकोर्ट का फैसला आया था। आरोपियों को ‘दोषी नहीं’ मानने का फैसला देने वाले जस्टिस के रविंद्र रेड्डी ने इस फैसले को सुनाने के बाद इस्तीफे की पेशकश की थी जिसे ठुकरा दिया गया था।
इस मामले के मुख्य आरोपी स्वामी असिमानंद के वकील जेपी शर्मा ने बताया “किसी भी आरोपी के खिलाफ अभियोजन पक्ष (एनआईए) एक भी आरोप साबित नहीं कर पाया और उन सभी को बरी कर दिया गया है।” लेकिन मीडिया ने फैसले के बारे में बात करने, उसके बारे में बताने के बजाए जज द्वारा इस्तीफे की खबर को दिखाना ज्यादा जरुरी समझा।
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने ट्विटर पर इस फैसले के खिलाफ हमला बोला: “एनआईए ने इस मामले में गंभीरता से जांच नहीं की क्योंकि उनके राजनीतिक मालिकों द्वारा उन्हें इसकी अनुमति नहीं थी।” वहीं फैसले के बाद भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने फैसले के बाद हिंदू धर्म को ‘बदनाम करने’ के लिए कांग्रेस पार्टी पर हमला किया और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम द्वारा ‘भगवा आतंक’ शब्द के उपयोग किए जाने पर उन्होंने करारा प्रहार किया था।
हाल ही में CAA के खिलाफ शाहीनबाग में चल रहे मुस्लिम समुदाय के धरने प्रदर्शन में चली गोलीबारी में गोली चलाने वाले शख्स कपिल गुर्जर का नाम आम आदमी पार्टी से जुड़ा होने के खुलासा होने के बाद हिन्दुओं को बदनाम करने की आम आदमी पार्टी की साज़िश भी बेनकाब हो गई। आम आदमी पार्टी ने बड़ी सावधानी से षड्यंत्र रच इसे हिन्दू आतंकवाद साबित करने का प्रयास किया। इसके लिए कपिल गुर्जर के मोबाइल से आप नेताओं के साथ वाले पुराने फोटो भी डिलीट करवाए लेकिन सत्य ज्यादा देर छुपा नहीं रह सकता।
आज जब आम आदमी पार्टी की हिंदुओ को बदनाम करने की साज़िश का खुलासा हुआ इसके बाद से खान मार्किट वाली “सेक्युलर मीडिया” भी अपने मुँह में दही जमाए बैठ गए है। कल तक BJP-RSS और हिन्दुओं को पानी पी पीकर कोसने वाले रविश कुमार अब वापस शाहीनबाग की जगह “बागों में बहार है” वाले गीत। गाते नज़र आएंगे।
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